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होली की मस्ती ने छीनी आंख और त्वचा की रंगत

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सीकर. रंगो के त्योहार की मस्ती में सराबोर होने के बाद अब लोग बीमारियों की चपेट में है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की तादाद बढ़ गई है। केमिकल वाला रंग किसी को त्वचा रोग दे गए तो किसी की आंख दुख रही है। कोई पेटदर्द से परेशान है तो कोई बुखार से तप रहा है। त्योहार पर मिली यह बीमारियां परेशानी का सबब बन गई हैं। इसकी बानगी शेखावाटी के सबसे बड़े कल्याण अस्पताल में बुधवार को देखने को मिली। अस्तपाल में सुबह से मरीजों की लंबी लाइने लग गईं। दोपहर तीन बजे तक ओपीडी में मरीजों की कतारें लगी रही। कल्याण अस्पताल और नेहरू पार्क स्थित जनाना अस्पताल में बुधवार को करीब 2400 से ज्यादा मरीज पहुंचे।
मेडिसिन में सबसे ज्यादा भीड़कल्याण अस्पताल में सबसे अधिक भीड़ मेडिसिन विभाग में रही। मेडिसिन में 611 मरीजों के पंजीयन हुए। नेहरू पार्क में शिशु रोग विभाग में बच्चों की कतार लगी रही। चिकित्सकों ने का कहना है कि होली के पर्व पर मिष्ठान सहित अन्य अनियमित खानपान की वजह से लोग बड़ी संख्या में बीमार पड़ रहे हैं। बुखार, पेटदर्द, उल्टी-दस्त के मरीज अधिक हैं। बच्चों में डायरिया और निमोनिया की संख्या अधिक है।
आंख और त्वचा के मरीज बढ़ेकेमिकल वाले रंगों के कारण अस्पताल के नेत्र और त्वचा रोग विभाग का आउटडोर अप्रत्याशित रूप से बढ़ा। ओपीडी में बैठने वाले चिकित्सकों ने बताया कि सामान्य दिनो की तुलना में आउटडोर 20 प्रतिशत तक ज्यादा रहा। बुधवार को रंगों के दुष्प्रभाव के कारण दो दर्जन से ज्यादा मरीज आंखों में जलन, त्वचा पर दाने, त्वचा के लाल होने और खुजली की शिकायत लेकर पहुंचे। एक मरीज की तो पटाखा चलाने के दौरान कॉर्निया तक डेमेज हो गया। उसे तुरंत ऑपरेशन करवाने की सलाह दी गई।
इनका कहना हैघटिया रंग के इस्तेमाल के कारण नेत्र रोग में पिछले दो दिन में मरीज 20 प्रतिशत तक बढ़े। एक मरीज का कॉर्निया तो पटाखे के कारण डेमेज हो गया। आंखो की रोशनी बनाए रखने के लिए मरीज को तुरंत ऑपरेशन की सलाह दी गई।डा जयवर्धन बाटड़, नेत्र रोग विशेषज्ञ, कल्याण अस्पताल
केमिकल वाले रंगों के कारण त्वचा संबंधी बीमारियों के मरीज बुधवार को ज्यादा रहे। इनमे अधिकतर मरीज जलन, लाल रंग होना और खुजली की शिकायत के है। ट्रोमा में भी देर तक ऐसे मरीज आते रहे।डा जितेन्द्र भूरिया, चर्म रोग विशेषज्ञ,एसके अस्पताल

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