कमलनाथ का शिवराज सरकार पर हमला,बोले- अभी तो एक दिन ही हुआ है

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मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य की नई सरकार और उसके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हमला बोला है.

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य की नई सरकार और उसके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हमला बोला है. कोरोनावायरस संकट के बीच बुलाए जा रहे विधानसभा सत्र को लेकर कमलनाथ ने ट्वीट किया,एक तरफ तो कोरोनावायरस को लेकर सुरक्षा व सावधानी के लिए तमाम निर्णय, प्रदेश में भी कर्फ्यू जैसे निर्णय. वहीं दूसरी तरफ शिवराज सरकार द्वारा खुद के नियमों का उल्लंघन कर कर्फ्यू में भी विधानसभा सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया, निर्णय समझ से परे है.

कमलनाथ ने एक अन्य ट्वीट में लिखा,विश्वास मत हासिल करने के लिए समय था.आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों? कोरोना से बचाव के लिए दोहरे मापदंड क्यों? जनता के लिए नियमों के पालन की शक्ति व खुद उल्लंघन पर उल्लंघन? अभी तो एक दिन ही हुआ है, कहेंगे कुछ करेंगे कुछ.

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के मध्य प्रदेश विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को राजभवन में सोमवार रात को राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.चौहान ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. शपथ ग्रहण करने के बाद चौहान ने जनता कर्फ्यू की सफलता का जिक्र करते हुए लोगों से आह्वान किया है कि वे कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए आगे आएं. शपथ ग्रहण समारोह में निवर्तमान मुख्यमंत्री कमलनाथ भी मौजूद रहे थे.

आपको बतादे कि शिवराज सिंह चौहान रिकॉर्ड चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्ममंत्री बन गए.वे राज्य के 32वें मुख्यमंत्री हैं.इससे पहले दिसंबर 2018 तक लगातार 13 साल प्रदेश के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे.शिवराज से पहले अर्जुन सिंह और श्यामाचरण शुक्ल तीन-तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं.2018 के विधानसभा चुनाव में शिवराज ने बुधनी से कांग्रेस प्रत्याशी अरुण यादव को 60 हजार वोटों से हराया था.शिवराज तो चुनाव जीत गए,लेकिन मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार बनाने में असफल रही.

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शिवराज राजनीतिक करियर में एक बार चुनाव हारे हैं.2003 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शिवराज को तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ राघौगढ़ से खड़ा किया.तब उमा भारती भाजपा से मुख्यमंत्री का उम्मीदवार थीं.यह चुनाव शिवराज हार गए.चौहान को भी पता था कि राघौगढ़ से दिग्विजय को हराना मुश्किल है, लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ना स्वीकार किया.

2018 में हुए विधाानसभा में भाजपा ने शिवराज के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा.पार्टी हार गई थी, पर वोट का प्रतिशत और सीट की संख्या बहुत ज्यादा कमी नहीं आई थी.प्रदेश में आने वाले दिनों में 25 सीटों पर उपचुनाव होने हैं.विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए शिवराज सरकार को 104 के आंकड़े की जरूरत थी. लेकिन बीजेपी ने 112 विधायकों का समर्थन साबित किया. इससे पहले 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद अल्पमत में आने के कारण कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था.विधानसभा में शिवराज सरकार को कुल 112 विधायकों का समर्थन हासिल हुआ. इसमें भाजपा के 107 के अलावा बसपा-सपा और निर्दलीय विधायकों ने भी बीजेपी का समर्थन किया.

Thought of Nation राष्ट्र के विचार
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